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सहरसा मिड डे मील कांड पर पटना हाईकोर्ट सख्त, 189 बच्चों के बीमार होने पर सरकार से रिपोर्ट तलब

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सहरसा के सरकारी स्कूल में मिड डे मील खाने के बाद 189 बच्चों के बीमार होने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है और सरकार, एसपी व एफएसएल से रिपोर्ट मांगी है।

सहरसा/आलम की खबर:सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित बलुआहा राजकीय मध्य विद्यालय में मिड डे मील खाने के बाद 189 बच्चों के बीमार होने की घटना ने पूरे बिहार में चिंता बढ़ा दी है। घटना के बाद पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और सहरसा के पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले की जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही भागलपुर स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल) से भोजन के सैंपल की जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में जमा करने को कहा गया है।

यह घटना 7 मई की है जब स्कूल में बच्चों ने मिड डे मील खाया और कुछ ही देर बाद कई छात्रों को पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और कमजोरी की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सभी प्रभावित बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज किया गया। जिला प्रशासन के अनुसार सभी बच्चों की हालत अब सामान्य है और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है।

घटना के बाद यह भी चर्चा सामने आई कि भोजन में किसी प्रकार की गंभीर गड़बड़ी थी और कुछ लोगों ने इसमें मरे हुए सांप की मौजूदगी का दावा किया, हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी थी और भोजन के सैंपल को एफएसएल भेजा गया था।

पटना हाईकोर्ट की जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने केवल सरकार से ही नहीं बल्कि खाद्य आपूर्ति विभाग, फूड एनालिस्ट और संबंधित अधिकारियों से भी रिपोर्ट मांगी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गलती किस स्तर पर हुई।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जिस एनजीओ के माध्यम से स्कूल में मिड डे मील की आपूर्ति की जा रही थी, उसे भी मामले में पक्षकार बनाया जाए। जानकारी के अनुसार भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति के माध्यम से भोजन की आपूर्ति की जा रही थी। अदालत अब यह भी जांच करेगी कि भोजन तैयार करने और वितरण में मानकों का पालन किया गया या नहीं।

इस पूरी घटना ने बिहार में चल रही मिड डे मील योजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के करीब 68 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में यह योजना लागू है, जहां कक्षा आठ तक के बच्चों को भोजन दिया जाता है। ऐसे में सहरसा की यह घटना पूरे सिस्टम की जांच की जरूरत को उजागर करती है।

फिलहाल इस मामले में अगली सुनवाई 2 जून को होगी, जहां विभिन्न जांच एजेंसियों की रिपोर्ट सामने आने की उम्मीद है। प्रशासन और अदालत दोनों की नजर अब इस बात पर है कि आखिर बच्चों के बीमार होने के पीछे असली कारण क्या था और जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

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